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Sila की सोच

Sila क्यों है: टीम और AI के सहयोग के लिए बुनियादी सिद्धांतों से दोबारा बनाई गई मैसेजिंग, Sila के संस्थापकों की ओर से।

अब तक की और आगे आने वाली हर महान कंपनी कम्युनिकेशन पर चलती है। यही वह पूरी नींव है जिस पर कंपनियाँ बनती हैं। लेकिन जिन टूल्स से हम बात करते हैं, वे एक दशक से भी पुराने हैं, उस दुनिया के लिए बने जो अब मौजूद ही नहीं है।

60% कर्मचारी कहते हैं कि उनके कम्युनिकेशन टूल्स उन्हें बोझिल महसूस कराते हैं। अंतहीन नोटिफ़िकेशन। लगातार एक काम से दूसरे काम पर कूदना। दिखावटी व्यस्तता, जिसे तरक्की समझ लिया जाता है। जिसे हम “दिखावटी काम” कहते हैं। AI ने इसे और बिगाड़ दिया है, क्योंकि काम की रफ़्तार बढ़ गई है।

इतिहास देखें, तो ऐसे ही बदलाव दिखते हैं: ईमेल काम करता था। फिर टीमों के साथ काम करने का तरीका बदला और Slack छा गया। ईमेल तब भी काम करता था और बेकार नहीं हुआ था, लेकिन दुनिया और कंपनियों के बात करने व काम करने का तरीका बदल चुका था। हम फिर से उसी मोड़ पर हैं।

AI काम करने के तरीके को जड़ से बदल रहा है: कम्युनिकेशन की मात्रा बेतहाशा बढ़ रही है, रफ़्तार थमने का नाम नहीं ले रही, और पूरे संगठन में तालमेल बिठाना हर कंपनी की सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। टूल्स पीछे छूट गए हैं। इस दुनिया के लिए किसी ने शुरुआत से कुछ नया नहीं बनाया। अब तक।

Sila ने टीम और AI के सहयोग के लिए मैसेजिंग को बुनियादी सिद्धांतों से दोबारा बनाया है। मानव प्रगति के अगले दौर को परिभाषित करने वाली कंपनियाँ इसी पर चलेंगी। महान कंपनियों की अगली पीढ़ी सोचेगी कि इसके बिना कोई काम कैसे करता था।

AI उतना ही ताकतवर है जितने उसे इस्तेमाल करने वाले लोग। वे लोग जो इसका इस्तेमाल अपना काम किसी और से बेहतर, तेज़ और बड़े पैमाने पर करने के लिए करते हैं। Sila इसी विश्वास पर बना है। Sila उन्हीं के लिए बना है। हम AI को वहाँ रखते हैं जहाँ असल में काम होता है, बातचीत के अंदर, फ़ैसलों में, उन पलों में जो कंपनियों को आगे बढ़ाते हैं। किसी ऐसे फ़ीचर की तरह नहीं जिसे आपको ढूँढना पड़े। बल्कि ऐसी चीज़ की तरह जो पहले से वहाँ है, पहले से काम कर रही है, हर बार जब आपकी टीम सहज रूप से बात करती है। Sila आपकी कंपनी को एक साथ मिलकर काम करने का नया तरीका देता है।

AI ने बदल दिया कि एक इंसान क्या कर सकता है। Sila बदलता है कि पूरी कंपनी मिलकर क्या कर सकती है। मानव प्रगति के हर दौर का अपना एक निर्णायक टूल रहा है। पीछे मुड़कर देखने पर हर एक अनिवार्य लगा। हम अभी उसी पल में जी रहे हैं। काम अब ऐसा ही दिखता है, और कल की सबसे महान कंपनियाँ इसी पर बनेंगी।

Mith Paresh Patel
को-फ़ाउंडर और CEO

आज ही Sila आज़माएँ